भारत की राष्ट्रभाषा क्या है और कौनसी होनी चाहिए?

भारत में अधिकतर लोग मानते हैं कि हिंदी ही भारत की राष्ट्रभाषा है, क्योंकि भारत में सबसे ज्यादा हिंदी भाषा का ही उपयोग किया जाता है। लेकिन यह सत्य नहीं है, अभी तक हिंदी या किसी और भाषा को इंडिया की राष्ट्र भाषा के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है। आइए जानते हैं, भारत की राष्ट्रभाषा क्या है और क्या होनी चाहिए? What is the India’s National Language in Hindi.

भारत की राष्ट्रभाषा क्या है और कौनसी होनी चाहिए?

हर देश की अपनी राष्ट्रभाषा होना गर्व की बात है, लेकिन दुनिया में कुछ देश ऐसे भी हैं जिनकी कोई Official language नहीं है। इन देशों में हमारा भारत भी शामिल है।

भारतीय होने के नाते हम भी चाहेंगे की भारत की अपनी राष्ट्रभाषा होनी चाहिए। लेकिन अभी तक किसी भी भाषा को भारत की राष्ट्रभाषा होने की उपलब्धि नहीं मिली है।

राष्ट्रभाषा क्या है?

किसी भी देश की संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा उसकी राष्ट्रभाषा होती है। जिसका प्रयोग उस देश में लिखने, पढ़ने और बातचीत करने के लिए किया जाता है।

राष्ट्रभाषा वह भाषा होती है जिसका देश के सभी कार्यों में उपयोग किया जाता है देश के सभी सरकारी काम उसी भाषा में होते हैं।

उदाहरण के लिए, हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में बंगाली भाषा को राजभाषा के रूप में मान्यता दी गई है और वहां पर सभी कार्य बंगाली भाषा में ही होते हैं।

भारत की राष्ट्रभाषा क्या है? India National Language in Hindi

भारतीय संविधान में किसी भी भाषा को राष्ट्रभाषा के रूप में नहीं माना गया है। यहां तक कि भारतीय संविधान में “राष्ट्रभाषा” का उल्लेख तक नहीं है।

हां भारत के संविधान में अनुच्छेद 343 के अंतर्गत हिंदी भाषा को भारत की राजभाषा के रूप में मान्यता दी गई है। इसका अर्थ यह है कि,

हिंदी भाषा का प्रयोग केवल राजकीय कार्यों में किया जा सकता है। हालांकि सरकार ने 22 भाषाओं को आधिकारिक भाषा के रूप में जगह दी है।

जिसमें केंद्र सरकार या राज्य सरकार अपनी जगह के अनुसार किसी भाषा को भी आधिकारिक भाषा के रूप में चुन सकते हैं।

केंद्र सरकार ने अपने कार्यों के लिए हिंदी और अंग्रेजी (Hindi and English) भाषा को आधिकारिक भाषा के रूप में जगह दी है।

इसके अलावा अलग-अलग राज्यों में उनकी अलग-अलग स्थानीय भाषा को आधिकारिक भाषा के रूप में चुना गया है। जैसे कि पंजाब में पंजाबी और कर्नाटक में कन्नड़।

इन 22 आधिकारिक भाषाओं में असमी, उर्दू, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, ओडिया, पंजाबी, संस्कृत, संतली, सिंधी, तमिल, तेलुगू, बोड़ो, डोगरी, बंगाली और गुजराती शामिल है।

इन सभी 22 भाषाओं को अधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता दी गई है। 2010 में गुजरात उच्च न्यायालय ने भी सभी भाषाओं को समान अधिकार के साथ रखने की बात कही थी।

भारत की राष्ट्रभाषा क्या होनी चाहिए?

जब भारतीय संविधान का निर्माण हो रहा था तो राष्ट्रभाषा (national language) का सवाल उठा था। डॉक्टर अंबेडकर चाहते थे कि संस्कृत इस देश की राष्ट्रभाषा बने।

परंतु सभी विधानसभा में उनका विरोध हुआ, क्योंकि विभिन्नता वाले इस देश में किसी एक भाषा को राष्ट्रभाषा के रूप में चुनना सभी के लिए सही कार्य नहीं था।

संविधान सभा में कई लोग हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा के रूप में चाहते थे, परंतु गैर हिंदी राज्यों के लोगों ने इसका विरोध किया और इस पर फैसला नहीं हो सका।

अभी तक भी भारत की राष्ट्रभाषा के रूप में किसी भी भाषा को आधिकारिक मान्यता नहीं मिली है। क्योंकि हर राज्य के लोग अपनी स्थानीय भाषा का ही इस्तेमाल करना चाहते हैं।

हिंदी वाले चाहते हैं कि हिंदी राष्ट्रभाषा बने, तमिल वाले चाहते हैं कि तमिल राष्ट्रभाषा बने। इसी तरह भारत में बोली जाने वाली हर भाषा के लोगों की यही राय है।

इसी वजह से अब भारत में हिंदी के अलावा अंग्रेजी का बोलबाला होता जा रहा है। अंग्रेजी अब भारत के हर राज्य में इस्तेमाल होने वाली भाषा बन गई है।

अंग्रेजी हमारी भाषा नहीं है, लेकिन फिर भी लोग अंग्रेजी बोलना अपनी शान समझते हैं। हिंदी या दूसरी लोकल लैंग्वेज बोलने वाले लोगों को छोटा या अनपढ़ समझा जाता है।

यह बात सही है कि भारत की कोई एक भाषा को राष्ट्रभाषा बनाना मुश्किल है, लेकिन जज्बात भी कोई चीज होती है। वर्ना इजराइली हिब्रू को अपनी राष्ट्रभाषा नहीं बनाते।

मैं भी चाहता हूं कि हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा बने, पर जब मैं दक्षिण भारत के उन लोगों के बारे में सोचता हूं जिनको हिंदी जरा सी भी नहीं आती तो सहम जाता हूं।

यही हमारी मुश्किल है, अगर हम हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाते हैं तो हिंदी लोगो को मनाना मुश्किल होगा और अगर हम गैर हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाते हैं तो हिंदी लोगों को मनाना मुश्किल होगा।

यानी कि अगर हमें किसी एक भाषा को देश की राष्ट्रभाषा बनाना है तो हमें उस भाषा को पूरे देश में प्रयोग में लाना होगा। भारत के हर व्यक्ति को वह भाषा आनी चाहिए।

आजादी को 70 साल से ज्यादा हो गए, लेकिन हम इस बारे में अब तक कुछ भी नहीं कर पाये हैं। हिंदुस्तान की राष्ट्रभाषा हिंदी हो सकती है लेकिन पहले हमें उन स्कूलों में हिंदी को लाना होगा जहां पर इंग्लिश तो पढ़ाई जाती है हिंदी नहीं।

हमें लोगों को यह समझाना होगा कि हम आप की स्थानीय भाषा के साथ छेड़खानी नहीं कर रहे हैं बल्कि हमारे देश के लिए अपनी अलग एक राष्ट्रभाषा सुन रहे हैं।

मुझे पूरा विश्वास है कि जब पूरे भारत में हिंदी को समझने वाले लोग होंगे तो कोई इसका विरोध नहीं करेगा और ना ही किसी को इससे कोई एतराज होगा।

निष्कर्ष,

बचपन में मैं भी सोचता था कि हिंदी ही हमारे देश की राष्ट्रभाषा है। लेकिन अफसोस हमारे देश की अभी तक कोई भी राष्ट्रभाषा नहीं है। मगर होनी चाहिए।

लेकिन किसी एक भाषा को देश की राष्ट्र भाषा चुनने से पहले हमें उस भाषा को पूरे देश में प्रयोग में लाना होगा। और वर्तमान स्थिति को देखते हुए लगता है कि ऐसा होना मुमकिन नहीं है।

क्योंकि अब लोग हिंदी से ज्यादा अंग्रेजी बोलना पसंद करते हैं। अंग्रेजी में बात करना शान समझा जाता है। हमारी इस गंदी सोच की वजह से हिंदी देश भर में बढ़ने की जगह उल्टा कम होती जा रही है।

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