Exit Poll क्या होता है और कैसे काम करता है? पूरी जानकारी

जब भी चुनाव होते है तो election result से ज्यादा लोगों को expit poll का इंतजार रहता है और पिछले कुछ चुनाव परिणामों को देखा जाए तो इनके आँकड़े सटीक होते है। इसे देख कर हर किसी के मन में ये सवाल जरूर आता है कि आखिर ये exit poll होते क्या है और इन्हे कैसे पता चल जाता है कि किसकी सरकार बनने वाली है। आज के इस आर्टिकल में हम आपको यही सब बताने वाले है जैसे कि exit poll क्या है, काम कैसे करता है, कैसे पता लगाते हैं किसकी सरकार बनेगी और मतदान के बाद ही क्यों जारी होते हैं?

Exit Poll

अभी भारत के राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और मिजोरम में चुनाव हुए है और 3 Dec 2023 को चुनाव रिजल्ट आने वाले है और आज यानि 30 Nov 2023 को शाम 6:00 PM तक सभी के exit poll result आ जायेगें।

तो इस मौके पर आज हम आपको exit poll से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब दे रहे है, जिससे आप लोगों को इसकी सही और जरूरी जानकारी पता चल सके, तो चलिए शुरू करते हैं।

Exit Poll क्या होता हैं?

एग्जिट पोल एक प्रकार का चुनावी सर्वेक्षण है, जो मतदान वाले दिन किया जाता है। एग्ज़िट पोल किसी भी अन्य पोल के समान ही होते हैं, सिवाय इस तथ्य के कि इनका उपयोग तब किया जाता है जब लोग चुनाव के दिन अपने चुने हुए उम्मीदवार के बारे में जानने के लिए मतदान केंद्र से बाहर आते हैं।

ये ऑनलाइन पोल या ऑफ़लाइन पोल हो सकते हैं, दोनों आधिकारिक परिणामों की भविष्यवाणी करने के प्रयास में आयोजित किए जाते हैं। चूंकि एग्ज़िट पोल लोगों के मतदान करने के बाद ही आयोजित किए जाते हैं, इसलिए वे ओपिनियन पोल की तुलना में अधिक विश्वसनीय होते हैं।

एग्जिट पोल के जवाब लगभग सटीक होते हैं, इसलिए इन्हें चुनाव के नतीजों की भविष्यवाणी का असली स्रोत माना जाता है। एग्जिट पोल उन लोगों की राय को भी प्रभावित कर सकते हैं जिन्होंने अभी तक मतदान नहीं किया है क्योंकि वे चुनाव के बाद के सर्वेक्षण हैं, लेकिन ओपिनियन पोल जैसी अन्य मतदान विधियों की तुलना में, एग्जिट पोल में राय में बदलाव उतना कठोर नहीं होता है।

एग्जिट पोल कब जारी होता है?

वोटिंग पूरी तरह खत्म होने के बाद एग्जिट पोल जारी किए जाते हैं। उदाहरण के तौर पर मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना में एक साथ विधानसभा चुनाव हो रहे हैं.

चार राज्यों में वोटिंग हो चुकी है, जबकि तेलंगाना में 30 नवंबर को वोटिंग होगी. तेलंगाना में वोटिंग खत्म होने के आधे घंटे बाद पांचों राज्यों के एग्जिट पोल जारी किए जाएंगे.

Exit Poll मतदान के बाद ही क्यों जारी होते हैं?

Exit Poll वोटिंग से पहले प्रसारित क्यों नहीं किया जा सकता? ये एक अहम सवाल है। दरअसल, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम-1951 की धारा 126ए के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदान शुरू होने से लेकर आखिरी चरण की वोटिंग खत्म होने के आधे घंटे बाद तक एग्जिट पोल जारी करने पर रोक है. इस कानून का पालन न करने पर दो साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

एग्जिट पोल को लेकर कब बने नियम?

चुनाव आयोग ने साल 1998 में पहली बार एग्जिट पोल को लेकर गाइडलाइन जारी की थी. इसके मुताबिक, 14 फरवरी शाम 5 बजे से 7 मार्च शाम 5 बजे के बीच ओपिनियन और एग्जिट पोल के नतीजे जारी करने पर रोक लगा दी गई थी.

इसके बाद ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल जारी करते हुए यह बताने का निर्देश दिया गया कि किस एजेंसी ने सर्वे किया, कितने मतदाताओं से सवाल पूछे गए और क्या-क्या सवाल पूछे गए. आपको बता दें कि साल 1998 में लोकसभा चुनाव का पहला चरण 16 फरवरी और आखिरी चरण 7 मार्च को हुआ था.

मीडिया संगठनों ने भी इसका विरोध करते हुए दिल्ली और राजस्थान हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनाव आयोग की गाइडलाइन पर रोक लगाने की मांग की थी. हालाँकि, अदालतों ने चुनाव आयोग के नियमों पर रोक नहीं लगाई। इस कारण वोटिंग खत्म होने तक ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल जारी नहीं हो सके.

1999 से 2009 तक चुनाव आयोग लगातार ओपिनियन पोल पर रोक लगाने के लिए कानून लाने की कोशिश करता रहा है. फरवरी 2010 में छह राष्ट्रीय और 18 क्षेत्रीय पार्टियों के समर्थन से धारा 126ए के तहत वोटिंग के दौरान एग्जिट पोल जारी न करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया. जबकि चुनाव आयोग ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल दोनों पर प्रतिबंध लगाना चाहता था.

दुनिया में एग्ज़िट पोल की शुरुआत कब हुई?

दुनिया की बात करें तो सबसे पहले सर्वे की शुरुआत अमेरिका में हुई थी। जॉर्ज गैलप और क्लाउड रॉबिन्सन ने अमेरिकी सरकार के कामकाज पर लोगों की राय जानने के लिए सर्वेक्षण (ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल) किया।

इसके बाद ब्रिटेन ने 1937 में और फ्रांस ने 1938 में पोल सर्वे कराया. जबकि जर्मनी, डेनमार्क, बेल्जियम और आयरलैंड में चुनाव से पहले सिर्फ ओपिनियन पोल कराया गया.

आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव को लेकर अलग-अलग एजेंसियां एग्जिट पोल में दावे कर रही हैं कि किसकी सरकार बनेगी. हालाँकि, ये दावे हमेशा सटीक नहीं होते हैं। साल 2004 और 2009 में तमाम एजेंसियों के दावे झूठे साबित हुए थे.

भारत में एग्जिट पोल शुरू

  • 1960 में, दिल्ली स्थित सेंटर फ़ॉर द स्टडी ऑफ़ डेवलपिंग सोसाइटीज़ (CSDS) की स्थापना की गई।
  • 1980 के दशक में पत्रकार प्रणब रॉय ने चुनाव विशेषज्ञ डेविड बटलर के साथ मिलकर एक सर्वे किया था, जो ‘द कंपेंडियम ऑफ इंडियन इलेक्शन’ किताब में प्रकाशित हुआ था.
  • 1996 में सीएसडीएस ने एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण किया, जिसे दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया।
  • 1998 में पहली बार निजी समाचार चैनलों पर एग्ज़िट पोल प्रसारित किये गये।

एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल में अंतर?

एग्जिट पोल मतदान के दिन आयोजित किए जाते हैं। वोट देने निकले मतदाताओं से पूछा जाता है कि उन्होंने किस पार्टी या उम्मीदवार को वोट दिया है। इस प्रकार प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण करके यह अनुमान लगाया जाता है कि चुनाव परिणाम क्या होंगे। चुनाव से पहले ओपिनियन पोल कराए जाते हैं.

इनमें सभी लोगों को शामिल किया जा सकता है, चाहे वे मतदाता हों या नहीं. इनमें आमतौर पर पूछा जाता है कि लोग किस पार्टी या उम्मीदवार को वोट देने की योजना बना रहे हैं. एग्ज़िट पोल और ओपिनियन पोल दोनों उपयोगी उपकरण हो सकते हैं, लेकिन उनकी भी सीमाएँ हैं।

एग्ज़िट पोल हमेशा सटीक नहीं होते, क्योंकि मतदाता मतदान के बाद अपनी राय बदल सकते हैं। जनमत सर्वेक्षण भी हमेशा सटीक नहीं होते, क्योंकि मतदाता चुनाव से पहले अपनी राय बदल सकते हैं।

एग्ज़िट पोल कैसे आयोजित किये जाते हैं?

एग्जिट पोल में एक सर्वे किया जाता है, जिसमें मतदाताओं से कई सवाल पूछे जाते हैं। उनसे पूछा जाता है कि उन्होंने किसे वोट दिया. ये सर्वे सिर्फ वोटिंग वाले दिन होता है. सर्वे एजेंसियों की टीमें पोलिंग बूथ के बाहर मतदाताओं से सवाल पूछती हैं.

इसका विश्लेषण किया जाता है और उसके आधार पर चुनाव नतीजों का अनुमान लगाया जाता है. भारत में कई एजेंसियां एग्जिट पोल कराती हैं।

चुनाव सर्वेक्षण तीन प्रकार के होते हैं

1. प्री पोलः

ये सर्वेक्षण चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद और मतदान शुरू होने से पहले आयोजित किए जाते हैं। उदाहरण के तौर पर पांच राज्यों की चुनाव तारीखों का ऐलान 9 अक्टूबर को हुआ था. अगर मध्य प्रदेश में 17 नवंबर को वोटिंग हुई तो प्री-पोल सर्वे 9 अक्टूबर के बाद और 17 नवंबर से पहले कराया गया होगा.

2. एग्जिट पोलः

यह सर्वे वोटिंग के दिन ही किया जाता है। इसमें मतदाताओं के मन को साधने की कोशिश की जाती है. छत्तीसगढ़ में दो चरणों में चुनाव हो रहे हैं. ऐसे में यह सर्वे हर चरण के मतदान वाले दिन ही किया जाता है. यह पोलिंग बूथ के बाहर किया जाता है और वोट देकर बाहर आने वाले लोगों से सवाल पूछे जाते हैं.

3. पोस्ट पोलः

यह सर्वे वोटिंग खत्म होने के बाद किया जाता है। जैसे 30 नवंबर को वोटिंग खत्म हो जाएगी. अब एक-दो दिन बाद पोस्ट पोल सर्वे शुरू हो जाएगा। इसमें आमतौर पर यह जानने की कोशिश की जाती है कि किस तरह के वोटर ने किस पार्टी को वोट दिया.

1996 का लोकसभा चुनाव एग्जिट पोल के लिहाज से बेहद अहम था. उस वक्त दूरदर्शन पर एग्जिट पोल दिखाए जाते थे. ये पहली बार था जब एग्जिट पोल के नतीजे टीवी पर दिखाए गए. यह सर्वे सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (सीएसडीएस) ने किया था।

उस चुनाव में सीएसडीएस ने अपने एग्जिट पोल में खंडित जनादेश की भविष्यवाणी की थी. हुआ भी वही। बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत से काफी दूर थी. अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने, लेकिन बहुमत न होने के कारण उन्हें 13 दिन के अंदर ही इस्तीफा देना पड़ा.

निष्कर्ष,

आज के इस आर्टिकल में हुमने आपको exit poll क्या है और कैसे काम करते है, इन्हे कैसे पता चलता है कि किसकी सरकारी बनेगी? इस सब के बारे मे बताया है?

उम्मीद है अब आपको exit poll के बारे मे सम्पूर्ण जानकारी हो गयी होगी, अगर अभी भी आपके मन मे कोई कन्फ्यूज़िंग है तो आप नीचे कमेन्ट करके अपना सवाल पूछ सकते हों।

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by: Jumedeen Khan

मैं इस ब्लॉग का संस्थापक और एक पेशेवर ब्लॉगर हूं। यहाँ पर मैं नियमित रूप से अपने पाठकों के लिए उपयोगी और मददगार जानकारी शेयर करता हूं। ❤️

Comments ( 3 )

  1. Apne bahut hi acche tarike se exit pole ke baare me bataya hai, dhanyavad

  2. कमाल के हिंदी का ब्लॉग बनाया है आपने और उससे भी बढ़िया आपका कंटेंट हैं कृपया लगातार पोस्ट लिखते रहिये आपके पोस्ट का इंतजार रहता हैं इस पोस्ट के लिए भी धन्यवाद!

  3. Good information

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