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कोर्ट मैरिज (Court Marriage) क्या है और कैसे करें?

भारत जैसे देश में जहां कई धर्म और रीति रिवाज़ के लोग एक साथ रहते हैं वहां शादियां भी अलग-अलग रिवाज़ों और रस्मों के अनुसार की जाती है। लेकिर कोर्ट मैरिज (court marriage) भारत में पंरपरागत शादियों से बहुत अलग होती है। कोर्ट मैरिज यानी विशेष विवाह में बिना किसी रस्म और रिवाज़ के दो लोग यानि लड़का-लड़की कानूनी तरीके से एक दूसरे के साथ शादी के बंधन में बंध जाते हैं। साथ ही कोर्ट मैरिज में किसी तरह की कोई धार्मिक पद्धति भी नहीं अपनाई जाती है। आज के इस आर्टिकल में हम इसी के बारे में जानेंगे कि ये कोर्ट मैरिज क्या होती है और कैसे करते है? (What is Court Marriage in Hindi)

कोर्ट मैरिज (Court Marriage) क्या है और कैसे करें?

शादी एक ऐसी चीज है जो दो लोगों के बीच एक सामाजिक या धार्मिक मान्यता का मिलन है। शादी जिसे विवाह भी कहा जाता है। इसका शाब्दिक अर्थ है, ‘उद्वह’ अर्थात् ‘वधू को वर के घर ले जाना।’ मैरिज करने के वैसे तो देश दुनिया में अपने-अपने तरीके और मान्यता होती हैं।

लेकिन इसके बावजूद आपकी शादी कानूनी तौर पर भी होनी जरूरी होती है। जिसके लिए आपको कोर्ट मैरिज के सभी नियमों और उसकी पूरी जानकारी का पता जरूरी है।

आज इस आर्टिकल के जरिए आपको हम कोर्ट मैरिज क्या है, कोर्ट मैरिज के नियम क्या है, कोर्ट मैरिज के लिए किन डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होती है, कोर्ट मैरिज के लिए कितने गवाहों की जरूरत होती है, कोर्ट मैरिज की कानूनी प्रक्रिया क्या है, कोर्ट मैरिज के लिए कितनी फीस लगती है आदि। इन सभी बातों की जानकारी साझा करेंगे।

इसीलिए इस आर्टिकल को पूरा अंत तक पढ़ें। (what is court marriage-full information in hindi) (rules for court marriage) (court marriage kya hai aur kaise kre) (court marriage ki hindi me puri jankari)

कोर्ट मैरिज क्या है और कैसे करे? पूरी जानकारी हिंदी में

सीधी सी भाषा में समझें तो कानूनी तौर पर शादी करना कोर्ट मैरिज होती है। जहां वकील या मैरिज ऑफिसर, शादी करने वाला जोड़ा और गवाह शामिल होते हैं। कोर्ट मैरिज करने के बाद जोड़ा legally पति-पत्नी (husband-wife) बन जाता है।

यहाँ पर हम कोर्ट मैरिज करने की पूरी प्रोसेस बता रहे है, जिन्हें फॉलो करके आप आसानी से कोर्ट मैरिज कर सकते है। तो चलिए शुरू करते है।

कोर्ट मैरिज के नियम (rules of court marriage)

  • शादी के लिए आवेदन करने वाले लड़का-लड़की दोनों में से किसी की भी पहले से कोई शादी नहीं होनी चाहिए।
  • अगर किसी की शादी पहले से हुई हो तो शादी में शामिल होने वाले दोनों पक्षों की पहली शादी से जुड़े पति या पत्नी जीवित न हो या कोई पहली शादी वेध न हो।
  • कोर्ट मैरिज की दूसरी शर्त यह है की दोनों पक्ष वैद्य सहमति देने के लिए सक्षम होने चाहिए। दोनों पक्षों को स्वेइच्छा से शादी में शामिल होना चाहिए। जैसे कि लड़का-लड़की दोनों समझबूझ रखने वाले व्यक्ति हो।
  • दोनों में से किसी की भी मानसिक हालत ऐसी नहीं होनी चाहिए कि वह विवाह के लिए वैध सहमति देने में सक्षम न हो।
  • कोर्ट मैरिज करने के लिए लड़के की उम्र 21 और दुल्हन की 18 साल से कम नहीं होनी चाहिए।
  • कोर्ट मैरिज की अगली शर्त यह भी है की दोनों पक्षकार संतान की उत्पत्ति के लिए शारीरिक रूप से योग्य होने चाहिए।
  • अगली शर्त में दोनों पक्षों का निषिद्ध संबंधों की सीमा से बाहर होना चाहिए। जैसे भाई बहन निषिद्ध अनुसूची में आते हैं या सगोत्री विवाह नहीं हो सकता।

कोर्ट मैरिज के लिए किन-किन डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होती है? (require documents for court marriage)

अगर कोई जोड़ा कोर्ट मैरिज करना चाहता हैं, तो सबसे पहले लड़का-लड़की का बालिक होना बेहद जरूरी होता है जिसके अनुसार लड़की की उम्र 18 साल और लड़के की उम्र 21 साल की होनी चाहिए।

कोर्ट मैरिज करने के लिए कपल को मात्र 3 दस्तावेजो की जरूरत पड़ती हैं, जो लड़का और लड़की दोनों के अपने-अपने होने चाहिए तभी कोर्ट मैरिज पॉसिबल है। इसके अलावा आपको नीचे दिए गए दस्तावेजों की भी जरूरत पड़ती है।

  • लड़का और लड़की के अडल्ट होने का दस्तावेज जैसे कि वोटर ID, लाईसेंस, आधार कार्ड।
  • दसवीं क्लास की मार्कशीट एक बेहद विश्वसनीय दस्तावेज है।
  • माता-पिता का सहमति पत्र जिसमें उनके हस्ताक्षर व उनकी ID की कॉपी होगी।
  • 3 स्वतंत्र गवाह जो आपको पहचाने व गवाह के तौर पर हस्ताक्षर करे।
  • लड़का और लड़की केस्वयं के घोषणा पत्र और शपथ पत्र जिसका प्रारूप स्थानीय कोर्ट या रजिस्टर अथॉरिटी के पास उपलब्ध होता है।
  • कोर्ट मैरिज करने के लिए आप के पास अपना निवास प्रमाणपत्र होना जरूरी हैं। जिसके लिए आपका आधार कार्ड होना एकदम अनिवार्य हैं, साथ में आप चाहे तो बिजली बिल की रसीद या ड्राइविंग लाइसेंसे भी दे सकते हैं।
  • कोर्ट मैरिज करने के लिए दस्तावेजो के साथ-साथ आपको अपनी अपनी फोटो भी चाहिए होगी, जिसमे लड़के के 6 और लड़की के भी 6 पासपोर्ट साइज़ फोटो होने जरूरी होती हैं।

कोर्ट मैरिज के लिए गवाह देने वाले व्यक्ति के दस्तावेज (Documents for the witness)

कोर्ट मैरिज करने के लिए आपको गवाह की भी जरूरत होती है। जिसके लिए आपको 2 या 3 गवाहों के साथ साथ उनके सबूत जैसे गवाहों के निवास प्रमाणपत्र और पेनकार्ड चल सकते हैं।

लेकिन याद रहे आज के समय में हर जरूरी दस्तावेज के तौर पर आधार कार्ड को सबसे पहले रखा जाता है। इसलिए गवाहों का आधार कार्ड दे सकते हैं।

ऐसे में आपके मन में ये सवाल जरूर उठ रहा होगा कि क्या बिना गवाह के कोर्ट मैरिज कर सकते है तो इसका जवाब ‘नहीं’ होगा। क्योंकि बिना गवाह के शादी नहीं हो सकती है।

कई लोग कोर्ट मैरिज घर वालों के खिलाफ जाकर भी करवाते हैं ऐसे में उनके पास गवाह के रूप में घर से कोई नहीं मौजूद होता है। तो अब वे कपल क्या करें, तो इसका सीधा सा जवाब है कि कोर्ट मैरिज में कोई भी व्यक्ति गवाह दे सकता हैं, फिर चाहे वह आप का कोई दोस्त हो या कोई भी रिश्तेदार हो या सगे-समन्धि में से कोई भी 2 व्यक्ति जो कोर्ट में गवाह दे सकता है। लेकिन दोनों गवाह बालिक होने अनिवार्य हैं।

कोर्ट मैरिज के लिए कानूनी प्रक्रिया क्या है (Legal process for court marriage)

कोर्ट मैरिज के लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी बेहद जरूरी होती है। तभी आप जान सकेंगे कि कोर्ट मैरिज के लिए क्या क्या बातें और शर्तें जरूरी हैं। इसमें क्या कर सकते है क्या नहीं कर सकते है ये सभी सवालों के जवाब आपको पता होना जरूरी होता है ताकि आगे चलकर आपको किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

तो चलिए आपको अब कोर्ट मैरिज के लिए Legal process यानि क़ानूनी प्रिक्रिया के बारे में जानकारी देते हैं। कोर्ट मैरिज के लिए रजिस्ट्रार को लिखित में नोटिस भेजना होता है कि वे शादी करने का इरादा रखते हैं।

  • 👉 नोटिस का पब्लिकेशन- संबंधित रजिस्ट्रार इस नोटिस की एक कॉपी अपने कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर लगाता है।
  • 👉 शादी पर आपत्ति- अगर शादी पर किसी को आपत्ति है तो वह उक्त नोटिस के पब्लिकेशन के 30 दिन के अंदर रजिस्ट्रार के सामने आपत्ति कर सकता है। अगर रजिस्ट्रार को लगता है कि आपत्ति जायज है तो शादी की प्रक्रिया खत्म कर सकता है। अगर, वह आपत्ति गलत पाता है तो शादी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर उसे रजिस्टर कर देता है। रजिस्ट्रार द्वारा आपत्ति को स्वीकार करने के खिलाफ जिला न्यायालय में अपील की जा सकती है।
  • 👉 घोषणा पत्र- कोर्ट मैरिज से पहले लड़का-लड़की और गवाहों को रजिस्ट्रार के सामने एक घोषणपत्र पर हस्ताक्षर करने होते हैं कि ये शादी बिना किसी दबाव के उनकी अपनी मर्जी से हो रही है।
  • 👉 शादी की जगह- सेक्शन 12 के मुताबिक कोर्ट मैरिज रजिस्ट्रार के कार्यालय में या उसके पास किसी जगह पर हो सकती है। इसके लिए नियत फीस जमा करना भी जरूरी है।
  • 👉 कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट- एक बार कोर्ट मैरिज के नियमों के मुताबिक शादी कंप्लीट होने के बाद रजिस्ट्रार सभी डिटेल भरकर मैरिज सर्टीफिकेट जारी करता है।
    इसके अलावा लड़का-लड़की को इस बात का ध्यान रखना होता है कि अगर शादी के नोटिस का पब्लिकेशन के 3 महीने के अंदर शादी नहीं हो पाती है तो बाद में आपको शादी करने के लिए दोबारा नोटिस देना पड़ेगा।

कोर्ट मैरिज की फीस – (fees for court marriage)

'हिन्दू विवाह अधिनियम के तहत सरकार आवेदन के लिए 100 रुपये लेती है। वहीं, विशेष विवाह कानून में आवेदन की फीस 150 रुपये है। इसके अलावा लोग आवदेन के साथ जमा करने के लिए जरूरी हलफनामों पर 400-500 रुपये खर्च भी करते हैं।

आप कोर्ट मैरिज बिना किसी परंपरागत समारोह के सिंपल तरिके से कोर्ट में मैरिज ऑफिसर के सामने कर सकते हैं। कोर्ट मैरिज विशेष विवाह अधिनियम के तहत पूरी होती है। इसके अलावा कोर्ट मैरिज किसी भी धर्म, संप्रदाय या जाति के बालिग लड़का-लड़की के बीच हो सकती है। कोर्ट मैरिज किसी विदेशी और भारतीय की भी हो सकती है।

Conclusion

तो दोस्तों हमने इस आर्टिकल के जरिए आपको कोर्ट मैरिज क्या है, कोर्ट मैरिज के नियम क्या है, कोर्ट मैरिज के लिए किन डौक्यूमैंट्स की जरूरत होती है, कोर्ट मैरिज के लिए कितने गवाहों की जरूर होती है, कोर्ट मैरिज की कानूनी प्रक्रिया क्या है, कोर्ट मैरिज के लिए कितनी फीस लगती है, इन सभी बातों की जानकारी साझा की।

उम्मीद करते हैं कि आपको इस आर्टिकल के जरिए कोर्ट मैरिज से जुड़ी सभी जानकारी मिल गई है। आपको यह जानकारी कैसी लगी आप हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं।

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Avatar for भावना गुप्ता

मैं भावना पेशे से एक न्यूज़ रिपोर्टर हु, साथ ही मुझे लिखने का भी शौक है। इस ब्लॉग पर मैं Howto, हेल्थ और एजुकेशन वाले आर्टिकल शेयर करती हु।

Comments ( 4 )

  1. भावना मैंम द्वारा लिखा गया ये आर्टिकल निश्चित ही उन सभी भाई बहनों की मदद करेगा जो कोर्ट के द्वारा विवाह करना चाह रहे हैं पर उस की प्रक्रिया नही मालूम होने और गवाह कौन होंगे इसकी जानकारी नही होने ,घर मे नोटिस पहुंचने के डर के कारण ,वो कदम आगे नही बढ़ाते , जबकि एक बालिग लड़का लड़की चाहें अपनी मनपसंद विवाह कर सकते है।

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  2. Sir, bhut achi jankari di hai aap ne. Thanks

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  3. Court marriage rajya sarkar ki taraf se hoti hai ya bharat sarkar ki taraf se.

    Reply
    • भारत में न्यायपालिका एक स्वतंत्र संस्था है, इसीलिए कोर्ट मेरिज राज्य सरकार या केंद्र सरकार दोनों में से किसी के अधीन नहीं आती|

      भारत में शक्ति पृथक्करण के अंतर्गत कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधयिका में शक्तियों को बंटवारा किया गया है|

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