नागरिकता संशोधन बिल (CAB) क्या है? जानिए हिंदी में

नागरिकता संशोधन बिल के बारे में  तो आपने सुना ही होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह नागरिकता संशोधन विधेयक क्या है? अगर नहीं तो चलिए आज इसके बारे में विस्तार से जान लेते हैं, नागरिक संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill) क्या है? सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल - What is CAB in Hindi?

नागरिकता संशोधन बिल - Citizen Amendment Bill

नागरिकता संशोधन बिल राज्यसभा और लोकसभा में पारित हो चुका है। इसे संविधान विरोधी बता रहा है देश भर में इसके लिए बवाल मचा हुआ है।

ऐसे में आपका यह जानना बहुत जरूरी है कि आखिर यह नागरिकता कानून क्या है और इसके लागू होने पर क्या-क्या बदलाव होंगे तथा किस आधार पर लोगों को नागरिकता दी जाएगी।

आईये जानते है, Citizen Amendment Bill kya hai, CAB kya hai, सिटीजन अमेंडमेंट बिल क्या है, नागरिकता कानून में इससे क्या बदलाव होंगे?

नागरिकता संशोधन बिल क्या है? What is Citizenship Amendment Bill in Hindi

नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill) एक ऐसा बिल है जिसे नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों में बदलाव करने के लिए बनाया गया है।

CAB इसका short name है, जिसकी Full form है Citizenship Amendment Bill, इसी को हिंदी में नागरिकता संशोधन विधेयक कहते हैं। ये नया नागरिकता कानून है।

जिसके तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं के साथ ही सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों (गैर-मुस्लिमों) के लिए बगैर वैध दस्तावेजों के भारतीय नागरिकता हासिल करना आसान हो जाएगा।

नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2022 को 19 जुलाई 2022 को लोकसभा में पेश किया गया था। 12 अगस्त 2022 को इसे संयुक्त संसदीय समिति को सौंपा गया था। समिति ने इस साल जनवरी 2022 में इस पर अपनी रिपोर्ट दी थी।

इसके बाद 9 दिसंबर 2022 को यह विधेयक दोबारा लोकसभा में पेश किया गया, जहां देर रात यह ध्वनिमत से पारित हो गया। कड़े विरोध के बावजूद सरकार के द्वारा नागरिकता संशोधन बिल 11 Dec 2022 को राज्यसभा से भी पास करवा लिया गया।

बिल के संसद से पास होने के बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के सभी गैरकानूनी प्रवासी हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई भारतीय नागरिकता के योग्य हो जाएंगे।

इसके अलावा इन तीन देशों के सभी छह धर्मों के लोगों को भारतीय नागरिकता पाने के नियम में भी छूट दी जाएगी। ऐसे सभी प्रवासी जो 6 साल से भारत में रह रहे होंगे, उन्हें यहां की नागरिकता मिल सकेगी। पहले यह समय सीमा 11 साल थी।

देशभर में इसका विरोध इसलिए हो रहा है क्योंकि इसमें मुस्लिमों को शामिल नहीं किया गया है, इसीलिए असदुद्दीन ओवैसी सहित विपक्ष के कई नेता इसे संविधान विरोधी बता रहे हैं।

नागरिकता संशोधन (CAB) लागू होने के बाद क्या-क्या बदलाव होंगे?

यहां सवाल यह उठता है कि Citizenship Amendment Bill लागू होने के बाद नागरिकता कानून में क्या क्या बदलाव होंगे। आपको आसानी से समझ आ जाए इसलिए मैं आपको सवाल जवाब के साथ बताता हूं।

1. नागरिकता संशोधन विधेयक क्या है?

नागरिकता संशोधन बिल, नागरिकता अधिनियम 1955 में बदलाव करेगा। इसके तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान समेत आस-पास के देशों से भारत में आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी धर्म वाले लोगों को नागरिकता दी जाएगी।

यानी कि मुस्लिमों को इसमें जगह नहीं दी गई है केवल गैर मुस्लिमों को ही भारतीय नागरिकता दी जाएगी। यही विवाद का सबसे बड़ा कारण बन रहा है।

2. भारत की नागरिकता मिलना होगा आसान?

इस बिल (CAB) के कानून में तब्दील होने के बाद अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान जैसे देशों से जो गैर-मुस्लिम शरणार्थी भारत आएंगे, उन्हें यहां की नागरिकता मिलना आसान हो जाएगा।

क्योंकि इस बिल में भारत की नागरिकता पाने के लिए केवल भारत में 6 साल बिताने होंगे। पहले नागरिकता देने का पैमाना 11 साल से अधिक था। अभी से 12 वर्ष से कम करके 6 वर्ष कर दिया गया है।

3. भारत में निवास की अवधि कम हो जाएगी?

जैसा कि मैंने ऊपर बताया है कि जहां पहले भारत की नागरिकता पाने के लिए शरणार्थियों को भारत में 11 साल तक निवास करना पड़ता था वहीं अब केवल 6 साल में ही रहना पड़ेगा।

नागरिकता संशोधन बिल में 11 साल की अवधि को कम करके 6 साल कर दिया गया है। वहीं कुछ अन्य बदलाव भी किए गए हैं जिनके तहत कुछ लोगों को तुरंत नागरिकता मिल जाएगी।

4. बिल पर किस बात का विरोध हो रहा है?

इस बिल को लेकर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया है, क्योंकि इसमें धर्म को लेकर पक्षपात किया गया है। नए संशोधन बिल में मुस्लिमों को छोड़कर अन्य धर्मों के लोगों को आसानी से नागरिकता देने का फैसला किया गया है।

विपक्ष इसी बात को उठा रहा है और मोदी सरकार के इस फैसले को धर्म के आधार पर बांटने वाला बता रहा है। उनका कहना है कि यह असंवैधानिक और गलत है।

इसीलिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) की कई सहयोगी पार्टियों ने भी इसका विरोध किया है। उनका कहना है कि इस बिल का मतलब मुसलमानों को दूसरे दर्जे का शहरी होने का अहसास कराना है।

साथ ही इससे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा, जिसमें समानता के अधिकार की बात कही गई है।

5. पूर्वोत्तर में ज्यादा हमलावर हो रहे हैं लोग?

अभी कुछ समय पहले ही नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन को लेकर असम समेत पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भारी विरोध हुआ था। NRC के तुरंत बाद अब नागरिकता संशोधन बिल (CAB) लाया गया, जिसका विरोध हो रहा है।

नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (North East Organization) की अगुवाई में पूर्वोत्तर के कई छात्र संगठनों ने इस बिल का विरोध किया। इसके अलावा कई अन्य राज्य सरकारी भी इसके खिलाफ है।

निष्कर्ष,

हालांकि इससे पहले भी 1995 और 2022 में नागरिकता संशोधन बिल में बदलाव किए जा चुके हैं लेकिन यह बदलाव सबसे अलग था क्योंकि इसमें जाति के आधार पर नागरिकता दी जानी तय की गई है।

लोगों की नाराजगी इसमें मुस्लिमों को शामिल ना करने की वजह से। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत के मुसलमान भारतीय नागरिक थे, हैं और बने रहेंगे। यह बिल केवल बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों को न्याय दिलाने के लिए है।

एक तरह से देखा जाए तो यह बिल्कुल सही है, क्योंकि इससे उन लोगों को फायदा होगा जो भारत का बंटवारा नहीं चाहते थे लेकिन मजबूरी में उन्हें बांग्लादेश और पाकिस्तान में रहना पड़ रहा है।

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